आयुर्वेदा में स्त्री रोगों में घरेलू उपचार

स्त्री रोगों में घरेलू उपचार

स्त्री रोगों में घरेलू उपचार – 

स्त्रियों में मासिक धर्म –

मजीठ को कूट कर कपड़े में छानकर 3 से 6 माशा तक पानी के साथ सुबह खायें | 25 दिन में रुका मासिक धर्म खुल जायेगा |

योनी की शिथिलता –

फिटकरी, सुपारी 2 तोला, बेर की छाल, छाप का फल 1 तोला सबको अलग-अलग कूटकर कपड़े से छान लें और सबको मिलाकर रख लें | 2-3 रत्ती चूरन योनी में डालें और 2-3 मिनट में धो लें न धोने से नुकसान होगा | इससे वृद्धा की योनी भी तरुणा स्त्री के समान हो जाती है |

बजुफल 1 तोला व् शहद 3 तोला लें बजुफल को कूटकर कपड़े से छान लें और शहद में मिलाकर योनी के अंदर लेप करें | कुछ देर के बाद उसे धो लें | इससे योनी का ढीलापन दू हो जाता है | योनी कुंवारी युवती की योनी की तरह हो जाती है | सिद्ध नुस्खा है अवश्य अजमाइश करें |

बाँझपन (गर्भ न होना) –

हाथी दाँत का चूर्ण बारीक पीसकर मासिक धर्म आ चुकने पर 3 माशा प्रतिदिन खिलाएं |

नागकेशर 900 ग्राम पीसकर कपड़छान करके 5 ग्राम सुबह-शाम गो-दूध के साथ स्त्री को 15 रोज तक खिलायें निश्चय ही पुत्रवती होगी |

गर्भ और योनी के दुसरे रोग –

गर्भाशय और योनी में सख्त जलन होने पर बनारसी आँवला के रस में मिश्री मिलाकर पिलायें | योनी की खुजली में नीम के क्वाथ में डूस करें | बच्चा होने की बाद बाँस के नर्म पत्तों का क्वाथ (काढा) पिलाते रहने से विषैला तरल पदार्थ आसानी से निकल जाता है और गर्भाशय सिकुड़कर अपनी वास्तविक अवस्था में आ जाता है |

मासिक धर्म खोलने वाली दवा –

  1. वायबिडंग 5 ग्राम को पहले बारीक कूट लें | फिर उसके बाद आधा लीटर पानी में उबालें | जब आधा पानी शेष रह जाए तो उसमें 25 ग्राम गुड़ मिलाकर चाय की छलनी में छान लें | पीने योग्य गर्म-गर्म पिलाएं | मासिक धर्म आरंभ होने के 4-5 दिन पहले देना आरंभ करें | इसकी चार मात्राएँ दें | इससे मासिक धर्म खुलकर आता है तथा गर्भाशय के सब दोष नष्ट हो जाते हैं |
  2. मुली, गाजर तथा मैथी तीनों के 60-60 ग्राम बीज लेकर कूटकर खूब बारीक कर लें | मासिक धर्म के दिनों में 12-12 ग्राम यह चूर्ण पानी के साथ लें | इससे रुका हुआ मासिक धर्म खुलकर आता है |

गर्भाशय की सोथ –

आकाश बेल, मकई टेसू के फुल बारीक पीसकर तिल के तेल में पकाकर नाभि के नीचे लेप करें | इससे गर्भाशय की सोथ (सुजन) समाप्त हो जाती है |

स्तनों में दूध की कमी –

डाल का पका पपीता लगातार 15-20 दिन खिलायें, स्तनों में दूध भर उठेगा |

25 ग्राम काली तिल्ली पीसकर 25 ग्राम मिश्री पिलायें स्तनों में दूध आ जायेगा |

कच्चे पपीता की सब्जी घी में बनाकर खाने से दूध बढ़ता है |

स्वेत पदर (ल्युकोरिया) –

लोध पीसकर 2-3 माशा प्रतिदिन खिलाते रहें |

इमली के बीज भुनकर छिलका उतार कर बारीक पीस लें | उसमें बराबर मिश्री मिलाकर 2 तोला सुबह गाय के दूध के साथ खाने से 20 दिन में सफेद पानी का निकलना बंद हो जायेगा |

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