Benefits Of Grapes And Beneficial In Cancer

लेटिन नाम – वाईटिस विनिफेरा (Vitis vinifera)

अंगूर स्वस्थ मनुष्यों के लिए पौष्टिक भोजन है और रोगी के लिए शक्तिप्रद पथ्य | जिन बड़े-बड़े भयंकर एंव जटिल रोगों में किसी प्रकार का कोई पदार्थ खाने-पीने को नहीं दिया जाता है उनमें अंगूर या दाख दी जाती है | भोजन के रूप में अंगूर कैंसर, क्षय (T.B), पायोरिया, एपेन्डीसाइटिस, बच्चों का सूखा रोग, सन्धिवात, फिट्स, रक्त विकार, आमाशय में घाव, गाँठे, उपदंश (सिफलिस), बार-बार मूत्र-त्याग, दुर्बलता आदि में दिया जाता है | अंगूर अकेला खाने पर लाभ करता है | किसी अन्य वास्तु के साथ मिलकर इसे नहीं खाना चाहिए | अंगूर सुख जानेपर किशमिश बन जाता है | जब अंगूर नहीं मिलता हो तो अंगूर की जगह किशमिश काम में ले सकते हैं |

जुकाम : नित्य कम से कम 50 ग्राम अंगूर खाते रहने से बार-बार जुकाम लग्न बंद हो जाता है |

गठिया : अंगूर शरीर से उन लवणों को निकल देता है जिनके कारण गठिया शरीर में बनी रहती है | गठिया की परिस्थितियों को साफ करने के लिए प्रांत: अंगूर खाते रहना चाहिए |

कैन्सर : कैंसर में पहले तीन दिन रोगी को उपवास करायें | फिर अंगूर सेवन कराना आरम्भ करें |कभी-कभी एनिमा लगायें | एक दिन में दो किलो से अधिक अंगूर न खिलायें | कुछ दिन पश्चात् छाछ पीने को दी जा सकती है | अन्य कोई चीज खाने को न दें | इससे लाभ धीरे-धीरे, महीनों में होता है | इसकी पुल्टिस घावों पर लगा सकते हैं | इस रोग की चिकित्सा में कभी-कभी अंगूर का रस लेने से पेट में दर्द, मलद्वार पर जलन हो सकती है | इससे डरना नहीं चाहिए, दर्द कुछ दिनों में ठीक हो जाता है | दर्द होने पर सेक कर सकते हैं |

कैंसर के रोगी पालन करें –

  1. रोगी को छह माह तक चूल्हे पर पकाई हुई खुराक नहीं दें |
  2. प्रथम दो महीने कैंसर के रोगी का आहार अंगूर ही रखें |
  3. इसके बाद अंगूर के साथ अन्य फलों का आहार किया जा सकता है | यह एक माह करें |
  4. इसके बाद वाले एक महीने में अंगूर व् फलाहार के साथ कच्चा भोजन किया जा सकता है | फलों में टमाटर, संतरा, मौसम्मी, काजू, बादाम है |
  5. इसके बाद एक महीने तक कुछ पक्वाहार दिया जा सकता है |
  6. अंगूर कल्प की सम्पूर्ण अवधि में पूरा आराम करना चाहिए |

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