Guava : अमरुद पेट-दर्द, पुराने दस्त, फोड़े फुंसी में कैसे लाभदायक है

अमरुद (Guava) पेट-दर्द, पुराने दस्त, फोड़े फुंसी में कैसे लाभदायक है

लेटिन नाम – सीडीयम गुयायावा (Psidium Guava)

कोई-कोई इसे जामफल भी कहते हैं | प्रकृति : न ठण्डा न गर्म

गुदा निकलता : टुट्टी करते समय किसी-किसी की गुदा (Anus) बाहर आती है | गुदा को अन्दर करके अमरुद (Guava) के पत्तों को पीस कर इसकी लुगदी मलद्वार पर बाँधने से गुदा बाहर निकलना बंद हो जाता है |

उन्माद (Mania) : इलाहाबादी मीठे अमरुद पाँव भर प्रांत:  और इतने ही पुन: शाम को पाँच बजे नित्य छ: सप्ताह खायें | साथ में नींबू, काली मिर्च, नमक-स्वाद के लिए अमरुद (Guava) पर डाल सकते हैं | इससे मस्तिष्क की मांश-पेशियों को शक्ति मिलेगी, गर्मी निकल जाएगी, उन्माद दूर होगा | अमरुद खाने से मानसिक चिन्ताएं भी दूर होती हैं |

फोड़े, फुंसी, रक्त-विकार हो गया हो, खुजली हो तो चार सप्ताह तक नित्य दोपहर में एक पाँव अमरुद खायें | इससे पेट साफ़ होगा, बढ़ी हुई गर्मी दूर होगी, रक्त साफ़ होगा और फोड़े, फुंसी, खुजली ठीक हो जाएगी |

पुराने दस्त : अमरुद की कोमल पत्तियां उबाल कर पीने से पुराने दस्त ठीक हो जाते हैं |

दस्तों में आँव आती रहे, आँतों में सुजन आ जाये, घाव हो जाए तो 2-3 महीने लगातार 250 ग्राम अमरुद खाते रहने से दस्त ठीक हो जाते हैं | अमरुद में टेनिक एसिड होता है, जिसका प्रधान काम है घाव भरना इससे आँतों के घाव भरकर आँते स्वस्थ हो जाती हैं |

पेट-दर्द में अमरुद की कोमल पत्तियां (Guava leaves) पीस कर पानी में मिला कर पीने से आराम होता है |

अपच, अग्निमांघ और अफारा के लिए अमरुद उत्तम औषधि है | इन रोग वालों को 250 ग्राम अमरुद खाना खाने के बाद खाना चाहिए | अन्य लोगों को खाने से पहले खाना चाहिए |

कफ युक्त खाँसी हो तो एक अमरुद को आग में भुन कर खाने से लाभ होता है |

बहुत पुरानी सर्दी-जुकाम तीन दिन तक केवल अमरुद खाकर रहने से ठीक हो जाती है |

भंग का नशा अमरुद खाने से या इसके पत्तों का रस पिलाने से उतर जाता है |

दन्त पीड़ा : अमरुद के पत्तों को चबाने से दांतों की पीड़ा दूर होती है | मसूड़ों में दर्द, सुजन, दातों में दर्द होने पर अमरुद के पत्तों को उबाल कर कुल्ले करें |

कब्ज : अमरुद खाने से आँतों में तरावट आती है और कब्ज दूर होती है | इसे रोटी खाने से पहले ही खाना चाहिए क्योंकि रोटी खाने के बाद खाने से कब्ज करता है | कब्ज वालों को नाश्ते में अमरुद लेना चाहिए | पुरानी कब्ज के रोगियों को प्रांत: शाम अमरुद खाना चाहिए | इससे दस्त साफ़ आयेगा | अजीर्ण और गैस दूर होगी | भूख लगेगी | इसे सैंधे नमक के साथ खाने से पाचन-शक्ति बढ़ती है |

शक्तिप्रद : सौ ग्राम अमरुद में ‘विटामिन सी’ 299 से 450 मिलीग्राम तक होती है | यह हृदय को बल देता है, स्फूर्ति और शक्ति होती है | प्यास हटाता है | मस्तिष्क को शक्ति देता है |

अर्श (Piles) : कुछ दिनों तक नित्य प्रांत: भूखे पेट 250 ग्राम अमरुद खाने से अर्श (टट्टी की जगह मुस) ठीक हो जाते हैं |

बवासीर, अर्श के कब्ज को दूर करने के लिए प्रांत: भूखे अमरुद खाना उत्तम है | टट्टी करते समय बायें पैर पर जोर देकर बैठें | इससे अर्श नहीं होते और मल साफ़ आता है |

मलेरिया : मलेरिया में अमरुद (Guava) लाभ करता है | मलेरिया के रोगी को अमरुद खिलाना चाहिये |

पेट-दर्द : अमरुद पर नमक डाल कर खाने से पेट के दर्द में लाभ होता है |

कब्ज : 250 ग्राम अमरुद खा कर ऊपर से गर्म दूध पीने से कब्ज दूर होता है |

कुकर खांसी : एक अमरुद को भुभल (गर्म रेत या राख) में सेंक कर खाने से कुकर खांसी में लाभ होता है |

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