गेंहूँ के पौधे (Wheatgrass) के रोगनाशक गुण कैंसर तक का उपचार जानिए Part-1

गेंहूँ के पौधे (Wheatgrass) 7-8 इंच से ज्यादा बड़े न होने पायें, तभी उन्हें काम में लाया जा सकता है | इसी कारण 10-12 गमले या चीड़ के बॉक्स रखकर बारी-बारी (प्राय: प्रतिदिन दो-एक गमलों में) आपको गेंहूँ के दाने बोने पड़ेंगे | जैसे-जैसे गमले खाली होते जायें, वैसे-वैसे उनमें गेंहूँ बोते चले जाइए | इस प्रकार प्राय: बारहा मास गेंहूँ उगाया जा सकता है |

उक्त महिला डॉक्टर ने अपनी प्रयोगशाला में हजारों रोगियों पर इस Wheatgrass Juice का प्रयोग किया है और इसका कारण यह है कि उसमें से किसी एक मामले में भी असफलता नहीं हुई |

रस निकालकर ज्यादा देर नहीं रखना चाहिए | ताजा ही सेवन कर लेना चाहिए | घंटा दो घंटा रखकर छोड़ने से उसकी शक्ति घट जाती है और तीन-चार घंटे बाद तो वह बिल्कुल व्यर्थ हो जाता है | डंढल और पत्ते इतनी जल्दी खराब नहीं होते | वे गमलों में हिफाजत से रक्खे जायें तो विशेष हानि नहीं पहुँच सकती है |

इसके साथ-साथ आप एक काम और कर सकते हैं | वह यह है कि आप आधा कप गेंहूँ लेकर धो लीजिये और किसी बर्तन में डालकर उसमें दो कप पानी भर दीजिए बारह घंटे बाद वह पानी निकाल कर आप सुबह, शाम पी लीजिए | वह आपके रोग को निर्मल करने में अधिक महायता करेगा | बचे गेंहूँ आप नमक और मिर्च डाल कर वैसे भी खा सकते हैं अथवा पीसकर हलवा बनाकर सेवन कर सकते हैं अथवा सुखाकर आटा पिसवा सकते हैं | सब प्रकार लाभ-ही-लाभ है |

ऐसा है यह गेंहूँ के पौधों (Wheatgrass) में भरा हुआ ईश्वर प्रदत्त अमृत ! लोगों को चाहिए कि वे इस अमृत का सेवन कर स्वयं सुखी हों और लाभ मालम हो तो परोपकार के विचार से इसका यथाशर्तेक प्रचार करके अन्य लोगों का कल्याण करें और महान पुण्य के भागी हों | गेंहूँ के पौधे का रस पीने से बाल भी कुछ समय के बाद काले हो जाते हैं | शरीर में तो ताकत बढ़ती है, मूत्राशय की पथरी भी ठीक हो जाती है | भूख खूब लगती है | आँखों की ज्योति बढ़ती है | विद्यार्थियों का शरीरिक व् मानसिक विकास सब होता है और स्मरण शक्ति बढ़ती है | छोटे बच्चों को भी यह रस दिया जा सकता है | छोटे बच्चों को पाँच-पाँच बूँद देना चाहिए |

रस धीरे-धीरे घूँट-घूँट पीना चाहिए | रस बनने पर तुरन्त पी लेना चाहिए | तीन घंटे में उसके पोषक गुण दूर हो जाते हैं | रस लेने के पूर्व तथा बाद में एक घंटे तक कुछ भी न खाया जाय | शुरू में कइयों को उलटी होगी और दस्त होने लगेंगे तथा सर्दी मालूम पड़ेगी | यह सब रोग होने की निशानी है | सर्दी, उलटी या दस्त से शरीर में एकत्रित मल बाहिर निकल जायेगा, इससे घबराने की जरूरत नहीं है | रस में अदरक अथवा खाने का पान मिला सकते हैं, इससे स्वाद गुण में वृद्धि हो जाती है | रस में नींबू अथवा नमक नहीं मिलाना चाहिए |

यह रस लेने वालों का अनुभव है कि इससे ऑंखें, दाँत और बालों को बहुत फायदा होता है और कब्ज नहीं रहती | इस रस के सेवन से कोई हानि नहीं होती | इसका सेवन करते समय सादा भोजन ही लेना चाहिए | तली हुई वस्तुयें नहीं खानी चाहिए |

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