Herbal Benefits of Radish (मुली) In Ayurveda

Herbal Benefits Of Radish (मुली) In Ayurveda

प्रकृति (Radish) : तर, गर्म और ठंडी।

गुर्दे के रोग, मूत्र कष्ट : आधा गिलास मूली का रस पिलाने से पेशाब के समय होने वाली जलन और  वेदना मिट जाती है |

पेशाब कम बनना : गुर्दे की खराबी से यदि पेशाब का बनना बंद हो जाये तो मूली का रस दो औंस प्रति मात्रा पीने से वह फिर बनने लगता है |

दाद – मूली (Radish) के बीज, गंधक, आमलासार, गूगल 2-2 तोले, नीला लूतीया 6 माशे बारीक करके आधा पाव जल में रगड़ो |जल सूखने पर गोलियाँ बना लो | एक गोली मूली के पत्तों को घिसकर दाद पर लगायें | दाद कुछ दिन में ठीक हो जायेगा |

पीलिया – मूली के पत्तों (Radish leaves) , मूली का रस आधा पाव, शक्कर 2 तोले मिलाकर सुबह 15-20 दिन पीने से पीलिया में बहुत लाभ होते है | खटाई का परहेज करें |

गुर्दे का दर्द – 1 तोला कलसी शोरा, आधा पाव मूली का रस खरल करके छोटे बेर के समान गोली बना लें | 1-1 गोली सुबह-शाम जल के साथ दें |

खुनी बवासीर – रसौत दो तोले मूली को खोखला करके उसमें भरकर मुहँ बंद करके उपलों की राख में भस्म कर लो |दुसरे दिन रसौत को निकालकर मूली के रस में छोटे बेर के समान गोली बनाओ | 1-2 गोली सुबह-शाम खाने से खुनी बवासीर में लाभप्रद है | गर्म चीजों का परहेज करें |

गले में सुजन – मूली का पानी 1 पाव, लाहौरी नमक तोला गर्म करके पिलाये |

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