जानिए नारंगी (Orange) खाने से किन-किन बिमारियों से नियात मिलती है

जानिए नारंगी (Orange) खाने से किन-किन

बिमारियों से नियात मिलती है

लेटिन नाम – साइट्रस रेटीक्यूलेटा (Citrus reticulata)

नारंगी या संतरा (Orange) ठंडा तन और मन को प्रसन्नता देने वाला है | उपवास और सभी रोगों में नारंगी दी जा सकती है | जिनकी पाचन-शक्ति खराब हो, उनको नारंगी रस तीन गुना पानी में मिलाकर देना चाहिए |

नारंगी प्रांत: भूखे पेट या खाना के पाँच घंटे बाद सेवन करने से सर्वाधिक लाभप्रद है | एक व्यक्ति को एक बार में एक या दो नारंगी लेना पर्याप्त है | नारंगी (Orange) में बिटामिन ‘सी’ प्रचुर मात्रा में पाया जाता है | एक व्यक्ति को जितने विटामिन ‘सी’ की आवश्यकता होती है, वह एक नारंगी प्रतिदिन खाते रहने से पूर्ति हो जाती है |

गुर्दे (Kidney) के रोग – प्रांत: नाश्ते में पहले 1-2 नारंगी खाकर गर्म पानी पीने या नारंगी का रस पीने गुर्दे के रोग ठीक हो जाते हैं | गुर्दे के रोगों से बचाव होता है | नारंगी गुर्दे को स्वच्छ रखने में उपयोगी है | सेव (Apple) और अंगूर (Grapes) भी समान लाभ पहुँचाते हैं | गुर्दे को स्वस्थ रखने के लिए प्रांत: भूखे पेट फलों का रस उप्जोगी है |

सर्दी, खाँसी होने पर गर्मी में ठंडे पानी के साथ और सर्दी में गर्म पानी से नारंगी रस पीने से लाभ होता है |

चेचक के दाग : नारंगी (Orange) के छिलके सुखा कर पीस लें | इसके चार चम्मच में गुलाब-जल मिलाकर पेस्ट बनाकर नित्य चेहरे पर मलें | चेचक के दाग हलके पड़ जायेंगे |

इन्फ्लूएंजा : संसार के कुछ भागों में विश्वास है कि जब इन्फ्लूएंजा हो रहा हो या महामारी के रूप में फ़ैल रहा हो तो नारंगी खाने से बचा जा सकता है, फ्लू होने पर भी यह लाभदायक है | इन्फ्लूएंजा होने पर केवल नारंगी ही खाते रहें, गर्म पानी पीयें यह ठीक हो जायेगा |

खाँसी – जुकाम : खाँसी – जुकाम होने पर नारंगी के रस का एक गिलास नित्य पीने से लाभ होगा | स्वाद के लिए नमक या मिश्री डाल कर पी सकते हैं |

बच्चों का सर्दी से बचाव : बच्चों को नियमित रूप से मीठी नारंगी का रस पिलाते रहने से सर्दी की ऋतू की कोई भी बीमारी नहीं होती | दूध-पीते बच्चों  लिए यह लाभदायक है | इससे शक्ति भी बढती है |

बच्चों का पौष्टिक भोजन : बच्चे को जितना दूध पिलायें उसमें उस दूध का एक हिस्सा मीठी नारंगी का रस मिला कर पिलायें | यह बच्चों का पौष्टिक पेय है | इससे शरीर का बजन भी बढ़ता है |

गर्भावस्था का भोजन : गर्भवती स्त्री को नित्य दो नारंगी दोपहर में पुरे गर्भकाल में खिलाते रहने से होने वाला शिशु सुन्दर होता है |

शिशु-शक्तिवर्धक : बच्चों को नारंगी का रस पिलाते रहने से वे थोड़े ही समय में मोटे-ताज़े हो जाते हैं तथा उनका पोषण द्रुतगति से होना है | हड्डियों की कमजोरी और टेढ़ापन दूर हो जाता है तथा हड्डियां मजबूत हो जाती हैं | बच्चे शीघ्र चलने-फिरने लगते हैं | डिब्बे या गाय का दूध  बोतल से पीने वाले बच्चों को तो नारंगी का रस निरन्तर पिलाना आवश्यक है | इसके रस से सुखा रोग-ग्रस्त बच्चे मोटे-ताजे हो जाते हैं | इसका रस आँतों की गति को तेज करता है |

मदिरापान छुड़ाना :  नाश्ते से पहले नारंगी खाने से मदिरापान की इच्छा घटती है |

पायोरिया में नित्य नारंगी खाने से लाभ होता है | नारंगी के छिलकों को छाया में सुखाकर पीसलें | इससे नित्य मंजन करें |

मधुमेह (Diabetes) : इसके रोगी को नारंगी कम मात्रा में दे सकते हैं |

आंत्रज्वर (Typhoid) : नारंगी गर्मी, ज्वर और अशांति दूर करती है | रोगी को दूध में नारंगी का रस मिलाकर पिलायें या दूध पिलाकर नारंगी खिलायें | दिन में कई बार नारंगी खिलानी चाहिए | रोगी को नारंगी खिला कर दूध पिलायें | इससे ऊष्मा कम होती है, मूत्र एवं मल खुल कर होता है |

रक्तशोधक : नारंगी रक्त की सफाई करती है |

घाव : नारंगी खाने से घाव जल्दी भरते हैं |

कब्ज : सुबह नाश्ते में नारंगी का रस कई दिन तक पीते रहने से मल प्राक्रतिक रूप से आने लगता है | यह पाचन-शक्ति बढ़ाती है | नारंगी का रस बेरी-बेरी रोग, स्क्रबी, जोड़ों का दर्द, शोथ में लाभप्रद है | यह हृदय, मस्तिष्क और यकृत को शक्ति और स्फूर्ति देता है |

मलेरिया : दो नारंगी के छिलके दो कप पानी में उबालें | आधा पानी रहने पर छानकर गर्म-गर्म पीयें |

वक्षरोग (Chest Diseases) : टी.बी., हृदय और छाती के सभी रोगों में नारंगी लाभदायक है |

पीलिया में नारंगी का सेवन लाभदायक है |

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